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Reliance Welcomes Appointment Of The Presiding Arbitrator (Hindi) - Reliance Industries Ltd.

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Published on Apr 29, 2014

सुप्रीम कोर्ट ने KG-D6 विवाद में नए अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेटर की नियुक्ति कर दी है। ऑस्ट्रेलिया के जस्टिस माईकल हडसन मैकह्यू इस ट्राईब्यूनल के तीसरे जज और अध्यक्ष होगें। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को बदलते हुए जस्टिस जेम्स स्पीगलमेन की जगह जस्टिस माईकल हडसन मैकह्यू को अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। जस्टिस माईकल हडसन मैकह्यू 1989 से 2005 तक ऑस्ट्रेलिया हाई कोर्ट के न्यायधीश रहे है। जस्टिस मैकह्यू को इंटरनेशनल लॉं में ख़ासा अनुभव हासिल है। इस ट्राइब्यूनल के दो अन्य सदस्य है सरकार की तरफ से जस्टिस खरे और रिलायंस की तरफ से जस्टिस भरूचा।

रिलायंस का कहना था क्योंकि तीन देशों की कम्पनियाँ KG-D6 में भागीदार हैं, इसलिए इन तीनों देशों का कोई सदस्य पंचाट का अध्यक्ष नहीं हो सकता, KG-D6 में रिलायंस की भागीदारी 60 फीसदी, ब्रिटेन की BP की भागेदारी 30 फीसदी और कनाडा की NIKO की भागीदारी 10 फीसदी की है। इसी तर्क के आधार पर ऑस्ट्रेलिया के एक जज को पंचाट का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

आर्बीट्रेशन ट्राईब्यूनल के गठन के बाद KG-D6 विवाद का हल हो सकता है क्योंकि ये विवाद उस समय पैदा हुआ था जब वहाँ पर अनुमान से कम गैस पायी गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने अनुचित तरीक़े से रिलाएंस की इनफ्रास्ट्रक्चर लागत की रिकवरी में कटौती कर दी थी। इससे दोनो पक्षो में विवाद हुआ और भारत सरकार और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच हुए प्रोडक्शन शेयरिंग कांट्रैक्ट के मुताबिक अगर दोनो पक्षो में कोई विवाद पैदा होता है, तो उसे आर्बिट्रेशन में ले जाया जाएगा, इसमें ये भी व्यवस्था है कि आर्बिट्रेशन ट्राईब्यूनल में तीन सदस्य होगें, जिसमें से एक सदस्य रिलायंस नियुक्त करेगा, एक भारत सरकार नियुक्त करेगी और तीसरा सदस्य ये दोनों चुने हुये सदस्य मिलकर नियुक्त करेंगे, इस मामले में सरकार काफी समय से हील हवाला कर रही थी, मामले को लटका रही थी, इसी कारण रिलायंस को न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा।

चूँकि अब आर्बिट्रैशन ट्राईब्यूनल का गठन हो गया है, तो हम उम्मीद करते हैं, कि जो पक्ष इस मामले को बेवजह पूरे देश में उठा रहे हैं, वे शांत हो जाएँगे, वे आदर करेंगे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का और ट्राईब्यूनल के नतीज़े की प्रतीक्षा करेगें।

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