just listen and then decide what is truth and untruth , Authentic guru like guru rampal ji maharaj incarnated only once, just blessed urself with his truth about this world. don't be a "lakir ka fakir" just know and then decide
वेद, गीता, पुराण, कुरान, बाईबल आदि में छुपे गूढ़ रहस्य को जानने के लिए आपको धैर्य रखते हुए ज्ञान पिपासु बनकर गुरुदेव जी के सत्संग की कुछ कड़ियाँ सुननी होंगी..
आपकी टिप्पणी से यह तो स्पष्ट है की आपने संत रामपाल जी के विचार पूर्ण रूप से सुने बिना ही अपने विचार व्यक्त किए हैं वरना आपको आवश्यकता ही नहीं पड़ती इतना कष्ट करने की .
जहाँ तक आलोचना की बात है तो संत रामपाल जी ने तो सिर्फ अन्य संतों के स्वानुभव से रचित पुस्तकों तथा हमारे पवित्र सद्ग्रंथों को ही तुलनात्मक तरीके से ज्यों का त्यों दिखाया है,
just listen and then decide what is truth and untruth , Authentic guru like guru rampal ji maharaj incarnated only once, just blessed urself with his truth about this world. don't be a "lakir ka fakir" just know and then decide
gobsmacked1100 1 year ago
मेरा दावा है फिर आपके ये विचार नहीं रहेंगे और अन्य संतों का शास्त्र-विरुद्ध ज्ञान भी आपकी समझ में आ जाएगा.
sachindhaka01 2 years ago
वेद, गीता, पुराण, कुरान, बाईबल आदि में छुपे गूढ़ रहस्य को जानने के लिए आपको धैर्य रखते हुए ज्ञान पिपासु बनकर गुरुदेव जी के सत्संग की कुछ कड़ियाँ सुननी होंगी..
sachindhaka01 2 years ago
आपकी टिप्पणी से यह तो स्पष्ट है की आपने संत रामपाल जी के विचार पूर्ण रूप से सुने बिना ही अपने विचार व्यक्त किए हैं वरना आपको आवश्यकता ही नहीं पड़ती इतना कष्ट करने की .
sachindhaka01 2 years ago
पूर्ण संत ही निर्भय वर्णन कर सकता है तथा झूठों को झूठा कह सकता है जो कटु सत्य होती है।
sachindhaka01 2 years ago
जो हमारे सद्ग्रंथों से नहीं मिलता.. अब हमारे सद्ग्रंथ सत्य हैं या उन तथाकथित संतों का स्व-अनुभव, ये फ़ैसला आपके ऊपर है.
sachindhaka01 2 years ago
जहाँ तक आलोचना की बात है तो संत रामपाल जी ने तो सिर्फ अन्य संतों के स्वानुभव से रचित पुस्तकों तथा हमारे पवित्र सद्ग्रंथों को ही तुलनात्मक तरीके से ज्यों का त्यों दिखाया है,
sachindhaka01 2 years ago
समाज को सही दिशा देने वाले संत से केवल वे व्यक्ति दुःखी होते हैं जिनकी पोल खुल जाती है, वे ही जनता को गुमराह करके मरने-मारने के लिए प्रेरित करते हैं।
sachindhaka01 2 years ago
2. जो उन गलत ज्ञान युक्त पुस्तकों को सत्य ज्ञान बताकर श्रद्धालु जनता को अज्ञान प्रचार करके गुरु, महाराज तथा महर्षि की उपाधी प्राप्त किए हुए हैं।
sachindhaka01 2 years ago
उस ठीक अनुवाद करने वाले अध्यापक का विरोध दो प्रकार के व्यक्ति करते हैं:-
1. उन गलत ज्ञान युक्त पुस्तकों को बेचकर अपना निर्वाह कर रहे स्वार्थी।
sachindhaka01 2 years ago