छोटीसादड़ी में बहुतायात किसानों द्वारा अफीम की खेती कि जाती है, ''अफीम की खेती करना मतलब नवजात शिशु को पालना" होता है. बहुत ही मेहनत व जतन के बाद यह फसल तैयार होती है.. बहुपयोगी तथा हर प्रकार से लाभ देने वाले फसल होती है अफीम. इस फसल में निकलने वाली अफीम जो सरकार द्वारा ही एक नी:श्चित दार पर खरीदी जाती है जिसमे तो किसान को विशेष फायदा नज़र नहीं आता परन्तु नियत मापदंड के बाद बची अफीम तस्करों द्वारा बहुत ऊँची कीमत पर खरीदी जाती है जिससे किसान की बल्ले-बल्ले हो जाती है ....अफीम के बाद इसके बीज जिन्हें पोस्त, खस-खस कहते है अच्छी कीमत पर मंडियों में बिक्री की जाती है .. यह सब होने के बाद पुरी बचे हुए खाखले (बीज व अफीम निकालने के बाद बचे डोडा की चुरी) भी सरकारी ठेकादारों द्वारा ऊँची कीमत पर खरीदी जाती है .. इसके बाद जो कचरा बचता है वो खाद व इंधन के रूप में काम आता है ... है ना अफीम टकसाल ...
fat bulbs!
dirtdemon6 10 months ago in playlist opium