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Uploaded by chiefsworldupdates on Aug 18, 2011
ITNA KYUN SOTHEIN HUM POEM BY PRASOON JOSHI ,WAKE UP INDIANS TIME TO ACT, TIME TO CHANGE , BEAUTIFUL POEM www.chiefsworld.activeboard.com
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लोरी नहीं तमाचा दे दो
एक छोटीसी आशा दे दो
वर्ना फिर से सो जायेंगे
सपनो में फिर खो जायेंगे
चलो पाप धोंते हे हम
इतना क्यूँ सोते हैं हम
इतना लम्बा इतना गहरा बेसुध क्यूँ सोते हैं हम
iirajii 6 months ago
सबने खेला और सब हारे
बड़ा अनोखा अजब खेल हैं
इंजिन काला डब्बे काले
बड़ी पुरानी धीट रेल हैं
इस रेल में क्यूँ होते हैं हम
खेत हमारा बीज हमारे
हेरत क्या अब फसल खड़ी हैं
खेत हमारा बीज हमारे
काटनी होगी छांटनी होगी
आज चुनोती बहुत बड़ी हैं
कांटे क्यूँ बोते हैं हम
नींद हैं या फिर नशा हैं कोई
धीरे धीरे जिसकी आदत पड़ जाती हैं
झूट की बारिश में सच की खामोश बांसुरी
एक झोंके की राह देख के सड़ जाती हे
बाद में क्यूँ रोते हैं हम
इतना लम्बा इतना गहरा बेसुध क्यूँ सोते हैं हम
दबे पाँव काली रातें आती जाती हैं
दबे पाँव क्या कभी बेधड़क हो जाती हैं
और बस करवट लेकर सब खोते हैं हम
May i have the lyrics
chitra182 6 months ago
Beautiful,motivating,thanks..wakai..itna kyu sote hai hum...!!!!
riturahulbansal 6 months ago
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लोरी नहीं तमाचा दे दो
लोरी नहीं तमाचा दे दो
एक छोटीसी आशा दे दो
वर्ना फिर से सो जायेंगे
वर्ना फिर से सो जायेंगे
सपनो में फिर खो जायेंगे
चलो पाप धोंते हे हम
इतना क्यूँ सोते हैं हम
इतना लम्बा इतना गहरा बेसुध क्यूँ सोते हैं हम
iirajii 6 months ago
सबने खेला और सब हारे
सबने खेला और सब हारे
बड़ा अनोखा अजब खेल हैं
इंजिन काला डब्बे काले
बड़ी पुरानी धीट रेल हैं
इस रेल में क्यूँ होते हैं हम
इतना क्यूँ सोते हैं हम
iirajii 6 months ago
खेत हमारा बीज हमारे
हेरत क्या अब फसल खड़ी हैं
खेत हमारा बीज हमारे
हेरत क्या अब फसल खड़ी हैं
काटनी होगी छांटनी होगी
आज चुनोती बहुत बड़ी हैं
कांटे क्यूँ बोते हैं हम
इतना क्यूँ सोते हैं हम
iirajii 6 months ago
नींद हैं या फिर नशा हैं कोई
धीरे धीरे जिसकी आदत पड़ जाती हैं
झूट की बारिश में सच की खामोश बांसुरी
झूट की बारिश में सच की खामोश बांसुरी
एक झोंके की राह देख के सड़ जाती हे
बाद में क्यूँ रोते हैं हम
इतना क्यूँ सोते हैं हम
iirajii 6 months ago
इतना क्यूँ सोते हैं हम
इतना क्यूँ सोते हैं हम
इतना लम्बा इतना गहरा बेसुध क्यूँ सोते हैं हम
दबे पाँव काली रातें आती जाती हैं
दबे पाँव क्या कभी बेधड़क हो जाती हैं
और बस करवट लेकर सब खोते हैं हम
इतना क्यूँ सोते हैं हम
iirajii 6 months ago
May i have the lyrics
chitra182 6 months ago
Beautiful,motivating,thanks..wakai..itna kyu sote hai hum...!!!!
riturahulbansal 6 months ago