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Uploaded by pksnain on Jun 30, 2010
Neem Karoli Baba - Authentic Vinay Chalisa - Kainchi Dham - Jaunapur Delhi Ashram - for more details visit http://www.neebkaroribaba.com/
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मैं हूँ बुद्धि मलीन अति श्रद्धा भक्ति विहीन
करूँ विनय कछु आपकी हूँ सब ही विधि दीन
जय जय नीब करोली बाबा कृपा करहु आवे सद्भावा
कैसे मैं तव स्तुति बखानू नाम गाम कछु मैं नहीं जानू
जापे कृपा द्रिष्टी तुम करहु रोग शोक दुःख दारिद हरहु
तुम्हरो रूप लोग नहीं जाने जापे कृपा करही सोई भाने
करी दे अर्पन सब तन मन धन पावे सुख अलौकिक सोई जन
jhonmish 2 weeks ago
दरस परस प्रभु जो तव करइ सुख सम्पति ताके घर भरइ
जय जय संत भक्त सुख दायक रिद्धी सिद्धि सब सम्पति दायक
तुम ही विष्णु राम श्री कृष्णा विचरत पूर्ण करत मम तृष्णा
जय जय जय श्री भगवंता तुम हो साक्षात् हनुमंता
कही विभीषण ने जो वाणी परम सत्य करी अब मैं मानी
बिनु हरि कृपा मिलही नहीं संता सो करी कृपा करही दुःख अन्ता
सोई भरोस मेरे उर आयो जा दिन प्रभु दर्शन मैं पायो
जो सुमिरे तुमको उर माहि ताकि विपति नष्ट ह्वै जाही
जय जय जय गुरु देव हमारे सब ही भांति हम भये तिहारे
हम पर कृपा शीघ्र अब करहु परम शांति दे दुःख सब हरहु
रोक शोक दुःख सब मिट जावे जपे राम रामही को ध्यावे
जा विधि होई परम कल्याणा सोई सोई आप देहु वरदाना
सब ही भांति हरि ही को पूजे राग द्वेष द्वंदन सो जूझे
करे सदा संतन की सेवा तुम सब विधि सब लायक देवा
सब कुछ दे हमको निस्तारो भव सागर से पार उतारो
मैं प्रभु शरण तिहारी आयो सब पुन्यन को फल है आयो
जय जय जय गुरु देव तुम्हारी बार बार जाऊ बलिहारी
सर्वत्र सदा घर घर की जानो रूखो सूखो ही नित खानों
भेष वस्त्र है सादा ऐसे जाने नहीं कोई साधू जैसे ऐसी है
प्रभु रहनी तुम्हारी वाणी कहो रहस्यमय भारी
नास्तिक हूँ आस्तिक ह्वै जावे जब स्वामी चेटक दिखलावे
सब ही धर्मन के अनुयायी तुम्हे मनावे शीश झुकाई
नहीं कोई स्वारथ नहीं कोई इच्छा वितरण कर देऊ भक्तन भिक्षा
केही विधि प्रभु मैं तुम्हे मनावू जासो कृपा प्रसाद तव पाऊ
साधू सुजन के तुम रखवारे भक्तन के हो सदा सहारे
दुष्टऊ शरण आनी जब परई पूरण इच्छा उनकी करइ
यह संतन कर सहज सुभाऊ सुनी आश्चर्य करइ जनि काउ
ऐसी करहु आप अब दाया निर्मल हुई जाई मन और काया
धर्म कर्म में रूचि होई जावे जो जन नित तव अस्तुति गावे
आवे सदगुन तापे भारी सुख सम्पति सोई पावे सारी
होय तासु सब पूरन कामा अंत समय पावे विश्रामा
चारी पदार्थ है जग माहि तव कृपा प्रसाद कछु दुर्लभ नाही
त्राहि त्राहि मैं शरण तिहारी हरहु सकल मम विपदा भारी
धन्य धन्य बढ भाग्य हमारो पायो दरस परस तव न्यारो
कर्म हीन अरु बुद्धि विहीना तव प्रसाद कछु वर्णन कीन्हा
श्रद्धा के यह पुष्प कछु चरनन धरी सम्हार
कृपा सिन्धु गुरु देव प्रभु करी लीजे स्वीकार सियावर राम चन्द्र गुरु पद शरणम
Thank you.
Lalitandree 11 months ago
Love ~ Gratitude
cathyginter 1 year ago
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कैसे मैं तव स्तुति बखानू नाम गाम कछु मैं नहीं जानू
जापे कृपा द्रिष्टी तुम करहु रोग शोक दुःख दारिद हरहु
तुम्हरो रूप लोग नहीं जाने जापे कृपा करही सोई भाने
करी दे अर्पन सब तन मन धन पावे सुख अलौकिक सोई जन
jhonmish 2 weeks ago
दरस परस प्रभु जो तव करइ सुख सम्पति ताके घर भरइ
जय जय संत भक्त सुख दायक रिद्धी सिद्धि सब सम्पति दायक
तुम ही विष्णु राम श्री कृष्णा विचरत पूर्ण करत मम तृष्णा
जय जय जय श्री भगवंता तुम हो साक्षात् हनुमंता
कही विभीषण ने जो वाणी परम सत्य करी अब मैं मानी
बिनु हरि कृपा मिलही नहीं संता सो करी कृपा करही दुःख अन्ता
सोई भरोस मेरे उर आयो जा दिन प्रभु दर्शन मैं पायो
जो सुमिरे तुमको उर माहि ताकि विपति नष्ट ह्वै जाही
जय जय जय गुरु देव हमारे सब ही भांति हम भये तिहारे
jhonmish 2 weeks ago
हम पर कृपा शीघ्र अब करहु परम शांति दे दुःख सब हरहु
रोक शोक दुःख सब मिट जावे जपे राम रामही को ध्यावे
जा विधि होई परम कल्याणा सोई सोई आप देहु वरदाना
सब ही भांति हरि ही को पूजे राग द्वेष द्वंदन सो जूझे
करे सदा संतन की सेवा तुम सब विधि सब लायक देवा
सब कुछ दे हमको निस्तारो भव सागर से पार उतारो
मैं प्रभु शरण तिहारी आयो सब पुन्यन को फल है आयो
जय जय जय गुरु देव तुम्हारी बार बार जाऊ बलिहारी
सर्वत्र सदा घर घर की जानो रूखो सूखो ही नित खानों
भेष वस्त्र है सादा ऐसे जाने नहीं कोई साधू जैसे ऐसी है
jhonmish 2 weeks ago
प्रभु रहनी तुम्हारी वाणी कहो रहस्यमय भारी
नास्तिक हूँ आस्तिक ह्वै जावे जब स्वामी चेटक दिखलावे
सब ही धर्मन के अनुयायी तुम्हे मनावे शीश झुकाई
नहीं कोई स्वारथ नहीं कोई इच्छा वितरण कर देऊ भक्तन भिक्षा
केही विधि प्रभु मैं तुम्हे मनावू जासो कृपा प्रसाद तव पाऊ
साधू सुजन के तुम रखवारे भक्तन के हो सदा सहारे
दुष्टऊ शरण आनी जब परई पूरण इच्छा उनकी करइ
यह संतन कर सहज सुभाऊ सुनी आश्चर्य करइ जनि काउ
ऐसी करहु आप अब दाया निर्मल हुई जाई मन और काया
jhonmish 2 weeks ago
धर्म कर्म में रूचि होई जावे जो जन नित तव अस्तुति गावे
आवे सदगुन तापे भारी सुख सम्पति सोई पावे सारी
होय तासु सब पूरन कामा अंत समय पावे विश्रामा
चारी पदार्थ है जग माहि तव कृपा प्रसाद कछु दुर्लभ नाही
त्राहि त्राहि मैं शरण तिहारी हरहु सकल मम विपदा भारी
धन्य धन्य बढ भाग्य हमारो पायो दरस परस तव न्यारो
कर्म हीन अरु बुद्धि विहीना तव प्रसाद कछु वर्णन कीन्हा
श्रद्धा के यह पुष्प कछु चरनन धरी सम्हार
कृपा सिन्धु गुरु देव प्रभु करी लीजे स्वीकार सियावर राम चन्द्र गुरु पद शरणम
jhonmish 2 weeks ago
Thank you.
Lalitandree 11 months ago
Love ~ Gratitude
cathyginter 1 year ago