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vinay chalisa_neem karoli baba_Maharaji Ji0002.wmv

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Uploaded by on Jun 30, 2010

Neem Karoli Baba - Authentic Vinay Chalisa - Kainchi Dham - Jaunapur Delhi Ashram - for more details visit http://www.neebkaroribaba.com/

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  • मैं हूँ बुद्धि मलीन अति श्रद्धा भक्ति विहीन

    करूँ विनय कछु आपकी हूँ सब ही विधि दीन

    जय जय नीब करोली बाबा कृपा करहु आवे सद्भावा

    कैसे मैं तव स्तुति बखानू नाम गाम कछु मैं नहीं जानू

    जापे कृपा द्रिष्टी तुम करहु रोग शोक दुःख दारिद हरहु

    तुम्हरो रूप लोग नहीं जाने जापे कृपा करही सोई भाने

    करी दे अर्पन सब तन मन धन पावे सुख अलौकिक सोई जन

  • दरस परस प्रभु जो तव करइ सुख सम्पति ताके घर भरइ

    जय जय संत भक्त सुख दायक रिद्धी सिद्धि सब सम्पति दायक

    तुम ही विष्णु राम श्री कृष्णा विचरत पूर्ण करत मम  तृष्णा

    जय जय जय श्री भगवंता तुम हो साक्षात् हनुमंता

    कही विभीषण ने जो वाणी परम सत्य करी अब मैं मानी

    बिनु हरि कृपा मिलही नहीं संता सो करी कृपा करही दुःख अन्ता

    सोई भरोस मेरे उर आयो जा दिन प्रभु दर्शन मैं पायो

    जो सुमिरे तुमको उर माहि ताकि विपति नष्ट ह्वै जाही

    जय जय जय गुरु देव हमारे सब ही भांति हम भये तिहारे

  • हम पर कृपा शीघ्र अब करहु परम शांति दे दुःख सब हरहु

    रोक शोक दुःख सब मिट जावे जपे राम रामही को ध्यावे

    जा विधि होई परम कल्याणा सोई सोई आप देहु वरदाना

    सब ही भांति हरि ही को पूजे राग द्वेष द्वंदन सो जूझे

    करे सदा संतन की सेवा तुम सब विधि सब लायक देवा

    सब कुछ दे हमको निस्तारो भव सागर से पार उतारो

    मैं प्रभु शरण तिहारी आयो सब पुन्यन को फल है आयो

    जय जय जय गुरु देव तुम्हारी बार बार जाऊ बलिहारी

    सर्वत्र सदा घर घर की जानो रूखो सूखो ही नित खानों

    भेष वस्त्र है सादा ऐसे जाने नहीं कोई साधू जैसे ऐसी है

  • प्रभु रहनी तुम्हारी वाणी कहो रहस्यमय भारी

    नास्तिक हूँ आस्तिक ह्वै जावे जब स्वामी चेटक दिखलावे

    सब ही धर्मन के अनुयायी तुम्हे मनावे शीश झुकाई

    नहीं कोई स्वारथ नहीं कोई इच्छा वितरण कर देऊ भक्तन भिक्षा

    केही विधि प्रभु मैं तुम्हे मनावू जासो कृपा प्रसाद तव पाऊ

    साधू सुजन के तुम रखवारे भक्तन के हो सदा सहारे

    दुष्टऊ शरण आनी जब परई पूरण इच्छा उनकी करइ

    यह संतन कर सहज सुभाऊ सुनी आश्चर्य करइ जनि काउ

    ऐसी करहु आप अब दाया निर्मल हुई जाई मन और काया

  • धर्म कर्म में रूचि होई जावे जो जन नित तव अस्तुति गावे

    आवे सदगुन तापे भारी सुख सम्पति सोई पावे सारी

    होय तासु सब पूरन कामा अंत समय पावे विश्रामा

    चारी पदार्थ है जग माहि तव कृपा प्रसाद कछु दुर्लभ नाही

    त्राहि त्राहि मैं शरण तिहारी हरहु सकल मम विपदा भारी

    धन्य धन्य बढ भाग्य हमारो पायो दरस परस तव न्यारो

    कर्म हीन अरु बुद्धि विहीना तव प्रसाद कछु वर्णन कीन्हा

    श्रद्धा के यह पुष्प कछु चरनन धरी सम्हार

    कृपा सिन्धु गुरु देव प्रभु करी लीजे स्वीकार सियावर राम चन्द्र गुरु पद शरणम

  • Thank you.

    

  • Love ~ Gratitude

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