The last sukta of Rigveda, Sangathn Sukta, is recited by 5 year old boy, Havishkrit Arya along with its meaning. This small presentation was given LIVE at Greater Atlanta Vedic Temple www.vedictemple.org.
सं समिद्युवसे से यहाँ तक के चार मन्त्र ऋग्वेद के अन्तिम मन्त्र हैं । ऋग्वेद में विज्ञानपरमाणु से लेकर ब्रह्मपर्यन्त सब पदार्थों का यथार्थ मनुष्योपयोगी ज्ञान-का
भगवान् ने उपदेश किया है । उस समस्त ज्ञान का फल मनुष्य के आचार-विचार की एकता होनी चाहिए, उसके लिये भगवान् ने ऋग्वेद के अन्त में इस सुन्दर, सुमनोहर
इस सूक्त का पहला मन्त्र भगवान से प्रार्थना है । प्रार्थी ने धन की प्रार्थना की है । भगवान् ने उत्तर में धन, सुख-साधन प्राप्त करने की युक्तियों का अगले तीन मन्त्रों में
उपदेश कर दिया है । उस उपदेश का सार यह है कि संघशक्ति उत्पन्न करो । संघशक्ति के लिए आचार, उच्चार, विचार की समानता, उद्देश्यों, भावनाओं की समता, दिलों और दिमाग़ों की एकता,
* (सह चित्त्मेषाम्)
rohinijanwadkar 2 years ago
ओम् सं समिद्युवसे वृषन्नग्ने विश्वान्यर्य आ।
इळस्पदे समिध्यसे स नो वसून्या भर ।। ऋग्वेद 10|191|1
rohinijanwadkar 2 years ago
संगच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम् ।
देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते ।। ऋग्वेद 10|191|2
rohinijanwadkar 2 years ago
समानो मन्त्र:समिति: समानी समानं मन: सह चित्तमेपाप् । समानं मन्त्रमभिमन्त्रये व: समानेन वो हविषा जुहोमि ।।
ऋग्वेद 10|191|3
rohinijanwadkar 2 years ago
समानी व आकूति: समाना हृदयानि व: । समानमस्तु वो मनो यथा व: सु सहासति ।। ऋग्वेद 10|191|4
rohinijanwadkar 2 years ago
सं समिद्युवसे से यहाँ तक के चार मन्त्र ऋग्वेद के अन्तिम मन्त्र हैं । ऋग्वेद में विज्ञानपरमाणु से लेकर ब्रह्मपर्यन्त सब पदार्थों का यथार्थ मनुष्योपयोगी ज्ञान-का
rohinijanwadkar 2 years ago
भगवान् ने उपदेश किया है । उस समस्त ज्ञान का फल मनुष्य के आचार-विचार की एकता होनी चाहिए, उसके लिये भगवान् ने ऋग्वेद के अन्त में इस सुन्दर, सुमनोहर
rohinijanwadkar 2 years ago
संज्ञान का उपदेश किया है । जो समाज या राष्ट्र इसके अनुसार आचरण करेगा, अवश्य वह धन-धान्य से परिपूर्ण और सुखसमृद्धि से समृद्ध होगा ।
rohinijanwadkar 2 years ago
इस सूक्त का पहला मन्त्र भगवान से प्रार्थना है । प्रार्थी ने धन की प्रार्थना की है । भगवान् ने उत्तर में धन, सुख-साधन प्राप्त करने की युक्तियों का अगले तीन मन्त्रों में
rohinijanwadkar 2 years ago
उपदेश कर दिया है । उस उपदेश का सार यह है कि संघशक्ति उत्पन्न करो । संघशक्ति के लिए आचार, उच्चार, विचार की समानता, उद्देश्यों, भावनाओं की समता, दिलों और दिमाग़ों की एकता,
rohinijanwadkar 2 years ago