Loading...
Uploaded by amrendratjnu on Sep 29, 2011
निरगुन गौनई मन का तिरपित कै दियत है, भितरे-बहिरे कै कलेस मिटावत है!.... ब्याकुल मन का गुरू-नेह-परवाना मिलि जाय तौ भरमब मिटि जात है, 'सतगुरु सनेहिया कै मिला परवाना/पल-छिन मा देखेउँ बनरसी सँग सजना!!'-- http://awadh.org/
Music
Standard YouTube License
Load more suggestions
Link to this comment:
All Comments (0)