Sri Madurai Shanmukhavadivu Subbulakshmi
மதுரை சண்முகவடிவு சுப்புலட்சுமி
AMMA Suswaralakshmi
!!! BRILLIANT !!!
BHAJAN
Mere to Giridhar Gopal dusro na koi
Jake sir more mukut mero pati soi (prabhu)
Shankha chakra gada padm kanthmala hoi
Tat mat bandhu bhrat aapna na koi
Chand dai kul ki kani kya karega koi
Asuwan jal seench seench prem bel boi
Daasi Mira prabhu lagan lagi honi ho so hoi
मीरा बाई, 1498 - 1547
मेरे तो गिरिधर गोपाल दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।
तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई॥
छाँड़ि दी कुल की कानि कहा करिहै कोई।
संतन ढिंग बैठि-बैठि लोक लाज खोई॥
चुनरी के किये टूक ओढ़ लीन्ही लोई।
मोती मूँगे उतार बनमाला पोई॥
अँसुवन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई।
अब तो बेल फैल गई आणँद फल होई॥
दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से बिलोई।
माखन जब काढ़ि लियो छाछा पिये कोई॥
भगत देख राजी हुई जगत देखि रोई।
दासी मीरा लाल गिरिधर तारो अब मोही॥
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