Uploaded by Pramod Kumar Meena, Chomu , Jaipur, Rajasthan,सारंगी पे केसरिया बालम आवो सा, पधारो मारे देस की लोक धुन । इस लोक-संगीत का प्रचलन शतकों पहले राजस्थान के ऐतिहासिक राज-दरबारों से हुआ माना जाता है। उस समय के लोक कलाकार राजा तेजाजी, गोगाजी तथा राजा रामदेवजी की गौरव गाथा का बख़ान करते हुए 'माँड' गाया करते थे। इस शैली का एक लोकगीत जो अत्यधिक लोकप्रिय हुआ वह है - 'केसरिया बालम आवो सा, पधारो मारे देस'।
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