मूलत: राहु-केतु दोनों ही आध्यात्मिक ग्रह हैं। अत: इन ग्रहों के विशेष अध्ययन की नितांत आवश्यकता है। वास्तव में राहु-केतु ग्रहों का हमारे कार्मिक फल से बहुत गहरा संबंध है। ये ग्रह जीवन के सूक्ष्म बिन्दुओं के ज्यादा निकट हैं। इनका सीधा संबंधा हमारी चेतना से है। (ये दोनों ग्रह अपना प्रभाव देने में अचूक हैं।
वैज्ञानिक विचार
राहु-केतु ग्रहों को छाया ग्रह कहा जाता है, क्योंकि आकाश में ये दोनों ग्रह बिन्दुओं के रूप में दृष्टिगोचर होते हैं। जहां सूर्य और चन्द्र पथ एक-दूसरे से मिलते हैं। उस बिन्दु विशेष को राहु-केतु छयाग्रह कहा गया है।
प्रभाव
मुख्यत: इन छाया ग्रहों से जातक के आंतरिक स्वभाव का पता चलता है। जिसके अनुसार जातक अपने जीवन को गतिमान कर सकता है। इन ग्रहों की स्पष्ट व्याख्या से व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों का पूर्वानुमान लगाकर उनसे अपनी सुरक्षा कर सकता है। किन्तु इन छाया ग्रहों के बारे में एक बात सत्य है कि इन ग्रहों द्वारा जीवन में जो भी अनिष्टकारी घटनायें होती है। वे जातक को आध्यात्म की ओर अग्रसर करती है। केतु एक धवजा भी है। किन्तु ध्वजा का अर्थ पताका या झंडा नही है। केतु को ध्वजा कहने का अर्थ है कि केतु परमात्मा की शक्ति का मूर्त रूप है। जिसके प्रभाव और चेतना से मनुष्य इस सृष्टि में व्याप्त उस सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी शक्ति का अनुभव कर सकता है।
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