Added: 2 years ago
From: sachindhaka01
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  • just listen and then decide what is truth and untruth , Authentic guru like guru rampal ji maharaj incarnated only once, just blessed urself with his truth about this world. don't be a "lakir ka fakir" just know and then decide

  • first of all , mai dev sharma aapse ye puchna chahta hu ki agar geeta ka naam lekar bhakta log satsang sunte hai to burai kya hai or aap kis aadhar per bharat ke santo or kathakaro per logo ko gumrah karne ka aarop lagate hai , ek nai kitab bandhi chor mai santo ko badnam karne ka ginona apradh kiya gaya hai jo sanskriti ke khilaaf shadyantr hai aap ko sacchey guru ki jaroorat hai ,or aap kisi bhi sant ke pass chale jaiye vahi aapke liye purn hai kyoki abhi to aapki shuruaat hi kharab hai,

  • प्रिय देव भाई, बंदी छोड़ कोई किताब नहीं है बल्कि इसका अर्थ है पापों के बंधनों से छुड़वाने वाला. यजुर्वेद में लिखा है: कविर अंघारि असि, बंभारि असि.. (watch?v=lsX6uIpDPmk)

  • अर्थात कबीर परमेश्वर सत्य भक्ति साधना करने वालों के पाप के बंधनों को काटकर उन्हें सर्व सुख व मोक्ष प्रदान करता है. सतगुरु रामपाल जी को परमात्मा ने तत्वज्ञान समझने की विशेष दृष्टि दी है..

  • जिससे उन्होने हमारे शास्त्रों में छुपे गूढ़ रहस्य प्रमाण सहित भक्त समाज को बताए हैं जिनको जान कर कुछ भी जानना शेष नहीं रहता और दुखी जन चमत्कारिक रूप से राहत प्राप्त कर..

  • कर ह्रदय से उनके अनुयायी बन जाते हैं. अन्य संतों व कथाकारों से गुरुदेव जी की कोई जाति दुश्मनी नहीं है वे केवल इतना चाहते हैं कि भक्त समाज वास्तविक शास्त्रानुकूल भक्ति मार्ग से परिचित होकर..

  • स्वंय सही गलत का निर्णय करे और अपना अमूल्य मनुष्य जीवन बर्बाद न करे. संत रामपाल जी का उद्देश्य है पवित्र वेदों, पवित्र श्रीमद्भगवतगीता, पवित्र पुराण, पवित्र बाइबिल और पवित्र कुरान शरीफ..

  • आदि सदग्रन्थों का यथार्थ ज्ञान मानव समाज को करवाना तथा पहले वाले आध्यात्मिक गुरुओं द्वारा किया गया सद्ग्रन्थों के विपरीत विवेचन भी श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष दिखाना।

  • जैसे किसी अध्यापक जी ने प्रश्न गलत हल कर रखें हैं उन गलत हल किए हुए प्रश्नों की ढेर सारी पुस्तकें छपकर विद्यार्थियों में बेची जा चुकी हैं। दूसरा शिक्षक आया, उसने देखा कि सर्व पुस्तकें..

  • पाठ्यक्रम के विपरीत ज्ञान अर्थात् गलत ज्ञान से भरी हुई हैं। उसका परम कर्तव्य बनता है कि वह प्रश्न सही हल करके विद्यार्थीयों का भविष्य उज्जवल बनाए।

  • उस ठीक अनुवाद करने वाले अध्यापक का विरोध दो प्रकार के व्यक्ति करते हैं:-

    1. उन गलत ज्ञान युक्त पुस्तकों को बेचकर अपना निर्वाह कर रहे स्वार्थी।

  • 2. जो उन गलत ज्ञान युक्त पुस्तकों को सत्य ज्ञान बताकर श्रद्धालु जनता को अज्ञान प्रचार करके गुरु, महाराज तथा महर्षि की उपाधी प्राप्त किए हुए हैं।

  • समाज को सही दिशा देने वाले संत से केवल वे व्यक्ति दुःखी होते हैं जिनकी पोल खुल जाती है, वे ही जनता को गुमराह करके मरने-मारने के लिए प्रेरित करते हैं।

  • जहाँ तक आलोचना की बात है तो संत रामपाल जी ने तो सिर्फ अन्य संतों के स्वानुभव से रचित पुस्तकों तथा हमारे पवित्र सद्ग्रंथों को ही तुलनात्मक तरीके से ज्यों का त्यों दिखाया है,

  • जो हमारे सद्ग्रंथों से नहीं मिलता.. अब हमारे सद्ग्रंथ सत्य हैं या उन तथाकथित संतों का स्व-अनुभव, ये फ़ैसला आपके ऊपर है.

  • पूर्ण संत ही निर्भय वर्णन कर सकता है तथा झूठों को झूठा कह सकता है जो कटु सत्य होती है।

  • आपकी टिप्पणी से यह तो स्पष्ट है की आपने संत रामपाल जी के विचार पूर्ण रूप से सुने बिना ही अपने विचार व्यक्त किए हैं वरना आपको आवश्यकता ही नहीं पड़ती इतना कष्ट करने की .

  • वेद, गीता, पुराण, कुरान, बाईबल आदि में छुपे गूढ़ रहस्य को जानने के लिए आपको धैर्य रखते हुए ज्ञान पिपासु बनकर गुरुदेव जी के सत्संग की कुछ कड़ियाँ सुननी होंगी..

  • मेरा दावा है फिर आपके ये विचार नहीं रहेंगे और अन्य संतों का शास्त्र-विरुद्ध ज्ञान भी आपकी समझ में आ जाएगा.

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