ये गलियों के आवारा बेकार कुत्ते कि बख्शा गया जिनको जौके गदाई ज़माने की फटकार सरमाया इनका जहाँ भर का दुत्कार इनकी कमाई ना आराम शब को ना राहत सवेरे गलाज़त में घर नालियों में बसेरे जो बिगडें तो इक दूसरे से लड़ा दो ज़रा एक रोटी का टुकडा दिखा दो ये हर एक की ठोकरें खाने वाले ये फाकों से उकता कर मर जाने वाले ये मजलूम मखलूक गर सर उठाये तो इन्सां सब सरकशी भूल जाए ये चाहें तो दुनिया को अपना बना लें ये आकाओं की हड्डियां तक चबा लें कोई इनको अहसास-ए-जिल्लत दिला दे कोई इनकी सोई हुई दुम हिला दे...
MrAbhiabhi11 1 year ago