शीशे के जैसा अंग है… फ़ूलों के जैसा रंग है! नदियों के जैसी चाल है… क्या हुस्न है... क्या हाल है! ये जिस्म की रंगीनियाँ… जैसे हजारों तितलियाँ! बाहों की ये गोलाईयाँ… आँचल में ये परछाईयाँ! ये नगरियाँ हैं ख्वाब की… कैसे बताऊँ मैं तुम्हें... हालत दिल–ऎ–बेताब की! कैसे बताऊँ मैं तुम्हें… मेरे लिये तुम कौन हो! कैसे बताऊँ… कैसे बताऊँ… कैसे बताऊँ मैं तुम्हें… मेरे लिये तुम धरम हो! मेरे लिये ईमान हो! तुम ही ईबादत हो मेरी… तुम ही तो चाहत हो मेरी! तुम ही अरमान हो मेरा!
मेरे लिये रोना भी तुम… और जागना सोना भी तुम! जाऊँ कहीं, देखूँ कहीं… तुम हो वहाँ… तुम हो वहीं! कैसे बताऊँ मैं तुम्हें… तुम बिन तो मैं कुछ भी नहीं! कैसे बताऊँ मैं तुम्हें… मेरे लिये तुम कौन हो! ये जो तुम्हारा रूप है… ये जिन्दगी की धूप है! चन्दन से तरसा है ये बदन… बहती है ईसमें एक अगन! ये शोखियाँ ये मस्तियाँ … तुमको हवाओं से मिली! जुल्फ़ें घटाओं से मिली... होठों में कलियाँ खिल गयीं… आखों को झीलें मिल गयीं! चेहरे में सिमटी चाँदनी… आवाज में है रागिनी!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें… मेरे लिये तुम कौन हो... कैसे बताऊँ... कैसे बताऊँ मैं तुम्हें, तुम धड्कनॊं का गीत हो, जीवन का संगीत हो, तुम जिन्दगी, तुम बन्दगी! तुम रोशनी, तुम ताजगी! तुम हर खुशी, तुम प्यार हो! तुम प्रीत हो, मनमीत हो! आँखों में तुम, यादों में तुम! साँसों में तुम, आहों में तुम! नींदों में तुम, ख्वाबों में तुम! तुम हो मेरी हर बात में… तुम हो मेरे दिन रात में! तुम सुबह में, तुम शाम में! तुम सोच में, तुम काम में! मेरे लिये पाना भी तुम! मेरे लिये खोना भी तुम! मेरे लिये हँसना भी तुम!
this is from pulotsav at pune... dont remember which year though! but here are the lyrics वही बारिश... वही बारिश जो आसमान से आती है, बूंदों में गाती है, पहाड़ो से फिसलती है, नदियों में चलती है, नहरों में मचलती है, कुए-पोखर से मिलती है, खपरेलों पर गिरती है, गलीयों में फ़िरती है, मोड़ पर संभलती है, फिर आगे निकलती है, वही बारिश... ये पानी जब आँख से ढलता है तो आंसू कहलाता है, लेकिन चेहरे पर चढ़ जाये तो रुबाब बन जाता है, कभी कभी ये पानी सरकारी फाइलों में अपने कुए समेत चोरी भी हो जाता है...
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thefusion1985 7 months ago
thefusion1985 7 months ago
thefusion1985 7 months ago
पानी तो पानी है, पानी जिंदगानी है
इस लिए जब रूह की नदी सुखी हो,
मन का हिरन प्यासा हो,
दिमाग में लगी हो आग, और प्यार की घागर खाली हो,
तब मै हमेशा बारिश नाम का गिला पानी लेने की राय देता हुं...
thefusion1985 7 months ago
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thefusion1985 7 months ago
Awweeeeeeeeeeeeeeeeeesooooooooooooommmmmmmmmmeeeeeeeeeee
ganeshndesai 9 months ago
Thanks for sharing...superb!!
shreeji5 9 months ago
Nana...wonderful poetry
ravindraxgopal 1 year ago
I have no idea abt the function.. I just have this clip
divyazcool 1 year ago
Which is this function?? can we see the whole function clipping? really very well said...
rakeshrege 1 year ago
Well said Nana
mcharya 1 year ago