भगवान् कुपित होकर बोले - “जंजीर बढ़ा कर साध मुझे हां हां दुर्योंधन बाँध मुझे, ये देख गगन मुझ मे लय है, मुझे, ये देख पवन मुझ मे लय है, मुझ मे वलीन झंनकार सकल, मुझ मे लय है संसार सकल, सब जन्म मुझी से पाते हें फिर लौट मुझी मे आते हें, ये देख जगत का आदि अन्त ये देख महाभारत का रण, मृत्तकों से पटी पड़ी भू है, पहचान कहां इसमे तू है” ।
दो न्याय अगर तो आधा दो, और उसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम। हम वहीं खुशी से खाएँगे, परिजन पर असि न उठाएँगे। लेकिन दुर्योंधन वह भी दे न सका, आशीष समाज की ले न सका। उलट हरि को बाँधने चला। जो था असाध्य साधने चला।हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया, डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
दो न्याय अगर तो आधा दो, पर उसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम। हम वही खुशी से खाएँगे, परिजन पर असि न उठाएँगे। दुर्योंधन वह भी दे न सका, आशीष समाज की ले न सका। उलटा हरि को बाँधने चला। जो था असाध्य साधने चला।हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया, डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान् कुपित होकर बोले- 'जंजीर बढ़ा...
bhai "Dinkar" hai yeh to ...piyush mishra ko saat janam lene honge dinkar ki baraabari karne me.....there is no comparison between dinkar and mishra.....
भगवान् कुपित होकर बोले - “जंजीर बढ़ा कर साध मुझे हां हां दुर्योंधन बाँध मुझे, ये देख गगन मुझ मे लय है, मुझे, ये देख पवन मुझ मे लय है, मुझ मे वलीन झंनकार सकल, मुझ मे लय है संसार सकल, सब जन्म मुझी से पाते हें फिर लौट मुझी मे आते हें, ये देख जगत का आदि अन्त ये देख महाभारत का रण, मृत्तकों से पटी पड़ी भू है, पहचान कहां इसमे तू है” ।
nicechamp 1 year ago 5
दो न्याय अगर तो आधा दो, और उसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम। हम वहीं खुशी से खाएँगे, परिजन पर असि न उठाएँगे। लेकिन दुर्योंधन वह भी दे न सका, आशीष समाज की ले न सका। उलट हरि को बाँधने चला। जो था असाध्य साधने चला।हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया, डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
nicechamp 1 year ago
sale hai sale hai...
prateeks333 1 year ago
apni bandukon ka istemaal kiya karo...
prateeks333 1 year ago
Comment removed
prateeks333 1 year ago
Aag lagadi Mishra ji nai.
nowherebuthere1 1 year ago
Who is Dinkar...???
natrud8991 1 year ago
@natrud8991 The original poem is by Ramdhari Singh 'Dinkar' called 'Rashmirathi'. Might want to check it out if inclined towards 'Vir ras'.
24x7movies 6 months ago 3
दो न्याय अगर तो आधा दो, पर उसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम। हम वही खुशी से खाएँगे, परिजन पर असि न उठाएँगे। दुर्योंधन वह भी दे न सका, आशीष समाज की ले न सका। उलटा हरि को बाँधने चला। जो था असाध्य साधने चला।हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया, डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान् कुपित होकर बोले- 'जंजीर बढ़ा...
aslambhai123211 1 year ago 10
bhai "Dinkar" hai yeh to ...piyush mishra ko saat janam lene honge dinkar ki baraabari karne me.....there is no comparison between dinkar and mishra.....
anytomdickandhary 1 year ago
@anytomdickandhary i am sure Mishra would agree with u as well
TheUltimatebay 1 year ago
piyush mishra kickass
appuraja420 1 year ago
brilliant!
narekage 2 years ago
ultimate if u can understand the meaning
maharshi006 2 years ago 2
@maharshi006 YEAH
aslambhai123211 1 year ago
awesome...
virajeee 2 years ago
Perfect
titanramones 2 years ago