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बन्दऊ गुरु पद कंज कृपा सिन्धु नर रूप हरि महा मोह तम पुंज जासु वचन रवि कर निकर
बन्दऊ गुरु पद पदुम परागा सुरुचि सुवास सरस अनुरागा
अमिय मूरी मय चूरन चारू समन सकल भव रुज परिवारू
सुकृति संभु तन विमल विभूति मंजुल मंगल मोद प्रसूति
जन मन मंजु मुकुल मल हरनी किये तिलक गुन गन बस करनी
श्री गुरु पद नख मनि गन ज्योति सुमिरत दिव्य द्रिष्टी हिय होती
दलन मोह तम सो सप्रकासू बड़े भाग उर आवई जासू
उधरही विमल विलोचन हिय के मिटहि दोष दुःख भव रजनी के
सूजहि राम चरित मणि मानिक गुपुत प्रगट जह जो जेहि खानिक
jhonmish 1 week ago
Comment removed
मैं हूँ बुद्धि मलीन अति श्रद्धा भक्ति विहीन
करूँ विनय कछु आपकी हूँ सब ही विधि दीन
जय जय नीब करोली बाबा कृपा करहु आवे सद्भावा
कैसे मैं तव स्तुति बखानू नाम गाम कछु मैं नहीं जानू
जापे कृपा द्रिष्टी तुम करहु रोग शोक दुःख दारिद हरहु
तुम्हरो रूप लोग नहीं जाने जापे कृपा करही सोई भाने
करी दे अर्पन सब तन मन धन पावे सुख अलौकिक सोई जन
दरस परस प्रभु जो तव करइ सुख सम्पति ताके घर भरइ
जय जय संत भक्त सुख दायक रिद्धी सिद्धि सब सम्पति दायक
तुम ही विष्णु राम श्री कृष्णा विचरत पूर्ण करत मम तृष्णा
जय जय जय श्री भगवंता तुम हो साक्षात् हनुमंता
कही विभीषण ने जो वाणी परम सत्य करी अब मैं मानी
बिनु हरि कृपा मिलही नहीं संता सो करी कृपा करही दुःख अन्ता
सोई भरोस मेरे उर आयो जा दिन प्रभु दर्शन मैं पायो
जो सुमिरे तुमको उर माहि ताकि विपति नष्ट ह्वै जाही
जय जय जय गुरु देव हमारे सब ही भांति हम भये तिहारे
हम पर कृपा शीघ्र अब करहु परम शांति दे दुःख सब हरहु
रोक शोक दुःख सब मिट जावे जपे राम रामही को ध्यावे
जा विधि होई परम कल्याणा सोई सोई आप देहु वरदाना
सब ही भांति हरि ही को पूजे राग द्वेष द्वंदन सो जूझे
करे सदा संतन की सेवा तुम सब विधि सब लायक देवा
सब कुछ दे हमको निस्तारो भव सागर से पार उतारो
मैं प्रभु शरण तिहारी आयो सब पुन्यन को फल है आयो
जय जय जय गुरु देव तुम्हारी बार बार जाऊ बलिहारी
सर्वत्र सदा घर घर की जानो रूखो सूखो ही नित खानों
भेष वस्त्र है सादा ऐसे जाने नहीं कोई साधू जैसे ऐसी है
प्रभु रहनी तुम्हारी वाणी कहो रहस्यमय भारी
नास्तिक हूँ आस्तिक ह्वै जावे जब स्वामी चेटक दिखलावे
सब ही धर्मन के अनुयायी तुम्हे मनावे शीश झुकाई
नहीं कोई स्वारथ नहीं कोई इच्छा वितरण कर देऊ भक्तन भिक्षा
केही विधि प्रभु मैं तुम्हे मनावू जासो कृपा प्रसाद तव पाऊ
साधू सुजन के तुम रखवारे भक्तन के हो सदा सहारे
दुष्टऊ शरण आनी जब परई पूरण इच्छा उनकी करइ
यह संतन कर सहज सुभाऊ सुनी आश्चर्य करइ जनि काउ
ऐसी करहु आप अब दाया निर्मल हुई जाई मन और काया
धर्म कर्म में रूचि होई जावे जो जन नित तव अस्तुति गावे
आवे सदगुन तापे भारी सुख सम्पति सोई पावे सारी
होय तासु सब पूरन कामा अंत समय पावे विश्रामा
चारी पदार्थ है जग माहि तव कृपा प्रसाद कछु दुर्लभ नाही
त्राहि त्राहि मैं शरण तिहारी हरहु सकल मम विपदा भारी
धन्य धन्य बढ भाग्य हमारो पायो दरस परस तव न्यारो
कर्म हीन अरु बुद्धि विहीना तव प्रसाद कछु वर्णन कीन्हा
श्रद्धा के यह पुष्प कछु चरनन धरी सम्हार
कृपा सिन्धु गुरु देव प्रभु करी लीजे स्वीकार सियावर राम चन्द्र गुरु पद शरणम
Thank you.
Lalitandree 10 months ago
Love ~ Gratitude
cathyginter 1 year ago
beautiful..thanks for posting this..love you Babaji
glorydassi 1 year ago
Thank you to Maharaj'ji and all devotees for keeping alive the stream of hi s and your blessings.
fourgates4591 1 year ago
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बन्दऊ गुरु पद कंज कृपा सिन्धु नर रूप हरि महा मोह तम पुंज जासु वचन रवि कर निकर
बन्दऊ गुरु पद पदुम परागा सुरुचि सुवास सरस अनुरागा
अमिय मूरी मय चूरन चारू समन सकल भव रुज परिवारू
सुकृति संभु तन विमल विभूति मंजुल मंगल मोद प्रसूति
जन मन मंजु मुकुल मल हरनी किये तिलक गुन गन बस करनी
श्री गुरु पद नख मनि गन ज्योति सुमिरत दिव्य द्रिष्टी हिय होती
दलन मोह तम सो सप्रकासू बड़े भाग उर आवई जासू
उधरही विमल विलोचन हिय के मिटहि दोष दुःख भव रजनी के
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jhonmish 1 week ago
मैं हूँ बुद्धि मलीन अति श्रद्धा भक्ति विहीन
करूँ विनय कछु आपकी हूँ सब ही विधि दीन
जय जय नीब करोली बाबा कृपा करहु आवे सद्भावा
कैसे मैं तव स्तुति बखानू नाम गाम कछु मैं नहीं जानू
जापे कृपा द्रिष्टी तुम करहु रोग शोक दुःख दारिद हरहु
तुम्हरो रूप लोग नहीं जाने जापे कृपा करही सोई भाने
करी दे अर्पन सब तन मन धन पावे सुख अलौकिक सोई जन
jhonmish 1 week ago
दरस परस प्रभु जो तव करइ सुख सम्पति ताके घर भरइ
जय जय संत भक्त सुख दायक रिद्धी सिद्धि सब सम्पति दायक
तुम ही विष्णु राम श्री कृष्णा विचरत पूर्ण करत मम तृष्णा
जय जय जय श्री भगवंता तुम हो साक्षात् हनुमंता
कही विभीषण ने जो वाणी परम सत्य करी अब मैं मानी
बिनु हरि कृपा मिलही नहीं संता सो करी कृपा करही दुःख अन्ता
सोई भरोस मेरे उर आयो जा दिन प्रभु दर्शन मैं पायो
जो सुमिरे तुमको उर माहि ताकि विपति नष्ट ह्वै जाही
जय जय जय गुरु देव हमारे सब ही भांति हम भये तिहारे
jhonmish 1 week ago
हम पर कृपा शीघ्र अब करहु परम शांति दे दुःख सब हरहु
रोक शोक दुःख सब मिट जावे जपे राम रामही को ध्यावे
जा विधि होई परम कल्याणा सोई सोई आप देहु वरदाना
सब ही भांति हरि ही को पूजे राग द्वेष द्वंदन सो जूझे
करे सदा संतन की सेवा तुम सब विधि सब लायक देवा
सब कुछ दे हमको निस्तारो भव सागर से पार उतारो
मैं प्रभु शरण तिहारी आयो सब पुन्यन को फल है आयो
जय जय जय गुरु देव तुम्हारी बार बार जाऊ बलिहारी
सर्वत्र सदा घर घर की जानो रूखो सूखो ही नित खानों
भेष वस्त्र है सादा ऐसे जाने नहीं कोई साधू जैसे ऐसी है
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प्रभु रहनी तुम्हारी वाणी कहो रहस्यमय भारी
नास्तिक हूँ आस्तिक ह्वै जावे जब स्वामी चेटक दिखलावे
सब ही धर्मन के अनुयायी तुम्हे मनावे शीश झुकाई
नहीं कोई स्वारथ नहीं कोई इच्छा वितरण कर देऊ भक्तन भिक्षा
केही विधि प्रभु मैं तुम्हे मनावू जासो कृपा प्रसाद तव पाऊ
साधू सुजन के तुम रखवारे भक्तन के हो सदा सहारे
दुष्टऊ शरण आनी जब परई पूरण इच्छा उनकी करइ
यह संतन कर सहज सुभाऊ सुनी आश्चर्य करइ जनि काउ
ऐसी करहु आप अब दाया निर्मल हुई जाई मन और काया
jhonmish 1 week ago
धर्म कर्म में रूचि होई जावे जो जन नित तव अस्तुति गावे
आवे सदगुन तापे भारी सुख सम्पति सोई पावे सारी
होय तासु सब पूरन कामा अंत समय पावे विश्रामा
चारी पदार्थ है जग माहि तव कृपा प्रसाद कछु दुर्लभ नाही
त्राहि त्राहि मैं शरण तिहारी हरहु सकल मम विपदा भारी
धन्य धन्य बढ भाग्य हमारो पायो दरस परस तव न्यारो
कर्म हीन अरु बुद्धि विहीना तव प्रसाद कछु वर्णन कीन्हा
श्रद्धा के यह पुष्प कछु चरनन धरी सम्हार
कृपा सिन्धु गुरु देव प्रभु करी लीजे स्वीकार सियावर राम चन्द्र गुरु पद शरणम
jhonmish 1 week ago
Thank you.
Lalitandree 10 months ago
Love ~ Gratitude
cathyginter 1 year ago
beautiful..thanks for posting this..love you Babaji
glorydassi 1 year ago
Thank you to Maharaj'ji and all devotees for keeping alive the stream of hi s and your blessings.
fourgates4591 1 year ago