मै शंकर का वह क्रोधानल, कर सकता जगती क्षार-क्षार. मै डमरू की वह प्रिय ध्वनि हूँ, जिसमे नाचता भीसड़ संहार. रणचंडी की अतृप्त प्यास, मैं दुर्गा का उन्मत्त हास. मैं यम की प्रलयंकर पुकार, जलते मरघट का धुआधार. फिर अंतरतम की ज्वाला से, जगती में आग लगा दूं मैं. गर धधक उठे जल, थल-अम्बर,जड़ चेतन तो कैसा विस्मय. हिन्दू तन मन,हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय..... वन्दे मातरम् ...... भारत माता की जय....
मै वीर पुत्र मेरि जननि के जग में जौहर अपार, अकबर के पुत्रो से पूछो क्या याद उन्हें वो मिना बाजार I
क्या याद उन्हें चित्तौड़ दुर्ग में जलने वाली आग प्रखर, जब हाय सहत्रो माताये तिल तिल जल कर हो गइ अमर, वह बुझने वाली आग नही रग रग में उसे समाये हूँ, कभी अचानक फुट पड़े विप्लव ले कर तो कैसा विश्मय !!!!!
Great work! and keep it up. One small improvement can be : End of the Shakha Whistle before calling the agresar. and Aram after completing the sankhya and telling sankhya to Karyawah.
वन्दे मातरम जय श्री राम ...भारत माता की जय...
sonikrishnkumar 3 months ago
csaronya 7 months ago 2
Jai Hind...
hatke159 1 year ago
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हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥
मै एक बिन्दु परिपूर्ण सिन्धु है यह मेरा हिन्दु समाज, मेरा इसका संबन्ध अमर मै व्यक्ति और यह है समाज
इससे मैने पाया तन मन इससे मैने पाया जीवन, मेरा तो बस कर्तव्य यही कर दू सब कुछ इसके अर्पण
मै तो समाज की थाति हूं मै तो समाज का हूं सेवक, मै तो समष्टि के लिए व्यष्टि का कर सकता बलिदान अभय
Rajsindore 1 year ago
हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥
होकर स्वतन्त्र मैने कब चाहा है कर लूं सब को गुलाम, मैने तो सदा सिखाया है करना अपने मन को गुलाम
गोपाल राम के नामोंपर कब मैने अत्याचार किया, कब दुनिया को हिन्दु करने घर घर मे नरसंहार किया
कोई बतलाए काबुल मे जाकर कितनी मस्जिद तोडी, भूभाग नही शत शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय!!!!
Rajsindore 1 year ago 2
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हिंदु तन मन हिंदू जीवन रग रग हिंदू मेरा परिचय,
हिंदु तन मन हिंदू जीवन रग रग हिंदू मेरा परिचय,
मैने छाती का लहु पिला पाले विदेश के क्षुदित लाल, मुझको मानव मानव में भेद नही मेरा अन्तर स्थल वर विशाल I
जग के ठुकराये लोंगो लो मेरे घर का खुला द्वार, अपना सब कुछ लूटा चुका फ़िर भी है अक्षय है धनागार II
मेरा हिरा पाकर ज्योतित फिरकियो का वह राज मुकुट, यदि इन चरणों में झुक जाए कल वह किरीटट तो कैसा विश्मय !!!
Rajsindore 1 year ago
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हिंदु तन मन हिंदू जीवन रग रग हिंदू मेरा परिचय,
मै तेज़ पुंज तम लिन जगत् में मैंने फैलाया प्रकाश, जगति का रच विनाश कब चाहा निज का विकाश I
सरनागत की रक्षा की है मैंने जीवन अपना दे कर, विश्वास यदि नही हों साक्षी है इतिहास अमर II
आज अगर दिल्ली के खंडहर सदियों की निंद्रा से जगकर, गुंजार उठे ऊँचे स्वर में "हिंदु की जय" तो क्या विश्मय!!!
Rajsindore 1 year ago
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हिंदु तन मन हिंदू जीवन रग रग हिंदू मेरा परिचय,
मै अखिल विश्व का गुरु महान, देता विद्या का अमर दान, मैंने दिखलाया मक्ति मार्ग रह्म मैंने सिखलाया ब्रम्ह ज्ञान I
मेरे वेदो का ज्ञान अमर मेरे वेदों की ज्योंति प्रखर, मानव के मन का अंधकार क्या कभी ठहर सकता क्षण भर II
मेरा सुरज नभ में गहर गहर , सागर ताल में छहर छहर इस कोने से उस कोने तक कर सकता जगति सौरभ मय
Rajsindore 1 year ago
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हिंदु तन मन हिंदू जीवन रग रग हिंदू मेरा परिचय,
मै शंकर का क्रोधानल, कर सकता जगति क्षार-क्षार, डमरु कि वह प्रलय ध्वनि हूँ जिसमे नचता भीषण सव्हार I
रण चंडी की अत्रप्त प्यास, मै दुर्गा का उन्मत्त हास मै यम की प्रयलंकर पुकार, जलते मरघट का धुआ धार II
फिर अंतर तम्र की ज्वाला से जगति में आग लगा दु मै, धधक उठे जल थल अम्बर जड़ चेता तो कैसा विश्मय ??
Rajsindore 1 year ago
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हिंदु तन मन हिंदू जीवन रग- रग हिंदू मेरा परिचय,
मै आदि पुरुष निर्भयता का वरदान लिये आया भु पर, पय पिकर सब मरते आए मै अमर हुआ लो विष पिकर I
अधरो की प्यास बुझायी है मैंने पिकर वो आग प्रखर , हों जाती दुनिया भस्मसात जिसको क्षण भर में ही छुकर II
भय से व्याकुल दुनिया में फ़िर आरम्भ किया मेरा पूजन, मै नर नारायन निलकंठ बन गया तो कैसा संशय !!!!!
Rajsindore 1 year ago
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हिन्दु तन मन हिन्दु जीवन रग रग हिन्दु मेरा परिचय॥
दुनिया के वीराने पथ पर जब जब नर ने खाई ठोकर, दो आँसू शेष बचा पाया जब जब मानव सब कुछ खोकर
मै आया तभि द्रवित होकर मै आया ज्ञान दीप लेकर, भूला भटका मानव पथ पर चल निकला सोते से जगकर
पथ के आवर्तोंसे थककर जो बैठ गया आधे पथ पर, उस नर को राह दिखाना ही मेरा सदैव का दृढनिश्चय!!!!
Rajsindore 1 year ago
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हिंदु तन मन हिंदू जीवन रग रग हिंदू मेरा परिचय,
मै वीर पुत्र मेरि जननि के जग में जौहर अपार, अकबर के पुत्रो से पूछो क्या याद उन्हें वो मिना बाजार I
क्या याद उन्हें चित्तौड़ दुर्ग में जलने वाली आग प्रखर, जब हाय सहत्रो माताये तिल तिल जल कर हो गइ अमर, वह बुझने वाली आग नही रग रग में उसे समाये हूँ, कभी अचानक फुट पड़े विप्लव ले कर तो कैसा विश्मय !!!!!
Rajsindore 1 year ago
Great work! and keep it up. One small improvement can be : End of the Shakha Whistle before calling the agresar. and Aram after completing the sankhya and telling sankhya to Karyawah.
herambkulkarni 1 year ago
great........!@@
hrish33 1 year ago
good effort
TraptbyBenjamin 1 year ago
wow this is really good......keep up the good work...
JAI SHREE RAM
AkkiSantana 1 year ago
great job
mayankaranya 1 year ago