पण्डित विष्णु दिगंबर पलुस्कर जी भारतीय संगीत के महानतम गायकों में से थे ,ग्वालियर घराने के इस महापुरुष के बिना भारतीय शास्त्रीय संगीत की कल्पना करना संभव नहीं है ,एसा महानगायक ,देशभक्ति से प्रेरित हो कर सन १९१५ से प्रतिवर्ष कांग्रेस के राष्...ट्रीय अधिवेसन में वन्दे मातरम गाने के लिए आते थे
,सन १९०५ से कांग्रेस अध्वेसन वन्दे मातरम गान से प्रारंभ होते थे ,लेकिन सन १९२३ के काकीनाडा अधिवेसन में तत्कालीन प्रेसिडेंट मोलाना मोहमद अली ने वन्देमातरम को हिन्दू धार्मिक कार्यक्रम कह कर विरोध किया ,पण्डित जी अपने स्वाभिमानी अंदाज में कहा ,वन्दे मातरम होगा ,जिनको नहीं सुनना हो ,बाहर जा सकते है
और समवेत स्वर में वन्देमातरम गायन प्रारंभ किया ,मोलाना और उनका छोटा भाई शोकत अली ,बाहर चले गए ,सारेदेश से आये प्रतिनिधियों ने ससम्मान वन्दे मातरम ,गान किया , लेकिन देश का दुर्भाग्य देखिये ,इसी काकीनाडा अधिवेसन में वन्दे मातरम के दो टुकड़े करने का निर्णय किया ,वन्दे मातरम गीत की केवल आगे की ६ पंक्तिया गाने का निर्णय किया ,और अली बंधुओ की देश द्रोही मांग के सामने कांग्रेस झुक गयी ,अनेक विद्वान् मानते है की वन्देमातरम गीत मात्र नहीं था ,स्वराज्य का सिद्ध मंत्र था ,और यह भारत विभाजन की नीव सिद्ध हुआ
पण्डित ओमकारनाथ ठाकुर ,पण्डित पलुस्कर जी के पाट शिष्य थे ,तथा भारत के महान गायक ,शाश्त्र्कार ,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के संस्थापक और अधिष्ठाता पण्डित ओमकारनाथ जी देश भर में अपने सार्वजानिक कार्यक्रमों में अपनी ओजस्वी वाणी से वन्दे मातरम गाते थे
पण्डित विष्णु दिगंबर पलुस्कर तथा पण्डित ओमकारनाथ जी राग बंगाली काफी में वन्दे मातरम गाते थे . १५ अगस्त १९४७ को जब देश के स्वतंत्र होने का समय आया तो सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पण्डित जी को वन्दे मातरम गाने का आग्रह किया ,पण्डित जी ,उस समय मद्रास थे ,उन्हें वायर लेस से सन्देश भेजा ,गया की विशेष विमान आपको लेने के लिए आ रहा है ,वन्दे मातरम का गायन करना है ,
पण्डित जी के सामने देश के स्वातंत्र्य के महान एतिहासिक अवसर पर वन्दे मातरम गाने का स्वर्णिम सौभग्य उपस्थित था ,लेकिन पण्डित जी विचलित नहीं हुए ,अपने महान गुरु का आदेश स्मरण था ,पण्डित जी ने सरदार पटेल को वायर लेस मेसेज करवाया ,कहा की ,वन्दे मातरम अवश्य गाऊंगा,लेकिन पूरा का पूरा गाऊंगा ,स्वीकार हो तो आता हु ,सरदार पटेल ने तुरंत हाँ कर दी ,और यह वन्दे मातरम आपके सामने है.
पण्डित विष्णु दिगंबर पलुस्कर जी भारतीय संगीत के महानतम गायकों में से थे ,ग्वालियर घराने के इस महापुरुष के बिना भारतीय शास्त्रीय संगीत की कल्पना करना संभव नहीं है ,एसा महानगायक ,देशभक्ति से प्रेरित हो कर सन १९१५ से प्रतिवर्ष कांग्रेस के राष्...ट्रीय अधिवेसन में वन्दे मातरम गाने के लिए आते थे
hindumarg 7 months ago
,सन १९०५ से कांग्रेस अध्वेसन वन्दे मातरम गान से प्रारंभ होते थे ,लेकिन सन १९२३ के काकीनाडा अधिवेसन में तत्कालीन प्रेसिडेंट मोलाना मोहमद अली ने वन्देमातरम को हिन्दू धार्मिक कार्यक्रम कह कर विरोध किया ,पण्डित जी अपने स्वाभिमानी अंदाज में कहा ,वन्दे मातरम होगा ,जिनको नहीं सुनना हो ,बाहर जा सकते है
hindumarg 7 months ago
और समवेत स्वर में वन्देमातरम गायन प्रारंभ किया ,मोलाना और उनका छोटा भाई शोकत अली ,बाहर चले गए ,सारेदेश से आये प्रतिनिधियों ने ससम्मान वन्दे मातरम ,गान किया , लेकिन देश का दुर्भाग्य देखिये ,इसी काकीनाडा अधिवेसन में वन्दे मातरम के दो टुकड़े करने का निर्णय किया ,वन्दे मातरम गीत की केवल आगे की ६ पंक्तिया गाने का निर्णय किया ,और अली बंधुओ की देश द्रोही मांग के सामने कांग्रेस झुक गयी ,अनेक विद्वान् मानते है की वन्देमातरम गीत मात्र नहीं था ,स्वराज्य का सिद्ध मंत्र था ,और यह भारत विभाजन की नीव सिद्ध हुआ
hindumarg 7 months ago
पण्डित ओमकारनाथ ठाकुर ,पण्डित पलुस्कर जी के पाट शिष्य थे ,तथा भारत के महान गायक ,शाश्त्र्कार ,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के संस्थापक और अधिष्ठाता पण्डित ओमकारनाथ जी देश भर में अपने सार्वजानिक कार्यक्रमों में अपनी ओजस्वी वाणी से वन्दे मातरम गाते थे
hindumarg 7 months ago
पण्डित विष्णु दिगंबर पलुस्कर तथा पण्डित ओमकारनाथ जी राग बंगाली काफी में वन्दे मातरम गाते थे . १५ अगस्त १९४७ को जब देश के स्वतंत्र होने का समय आया तो सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पण्डित जी को वन्दे मातरम गाने का आग्रह किया ,पण्डित जी ,उस समय मद्रास थे ,उन्हें वायर लेस से सन्देश भेजा ,गया की विशेष विमान आपको लेने के लिए आ रहा है ,वन्दे मातरम का गायन करना है ,
hindumarg 7 months ago
पण्डित जी के सामने देश के स्वातंत्र्य के महान एतिहासिक अवसर पर वन्दे मातरम गाने का स्वर्णिम सौभग्य उपस्थित था ,लेकिन पण्डित जी विचलित नहीं हुए ,अपने महान गुरु का आदेश स्मरण था ,पण्डित जी ने सरदार पटेल को वायर लेस मेसेज करवाया ,कहा की ,वन्दे मातरम अवश्य गाऊंगा,लेकिन पूरा का पूरा गाऊंगा ,स्वीकार हो तो आता हु ,सरदार पटेल ने तुरंत हाँ कर दी ,और यह वन्दे मातरम आपके सामने है.
hindumarg 7 months ago